गुड़ी पड़वा, जानिए आखिर क्यों मनाया जाता है यह त्यौहार
गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र का एक प्रमुख (रिपोर्टर:- नरसिंग बी बोल्लम आजतकन्युज18.इन
हिंदू त्यौहार है। यह पर्व नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है और विशेष रूप से हिंदू समाज में इसे बहुत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
हिंदू नववर्ष की शुरुआत के साथ गुड़ी पड़वा का पावन पर्व बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व हर साल चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है और गुड़ी पड़वा के साथ ही नव वर्ष की शुरुआत मानी जाती है, वहीं इस दिन से ही चैत्र नवरात्रि की भी शुरुआत हो जाती है
यह त्योहार नई शुरुआत, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग घरों में गुड़ी स्थापित करते हैं, पूजा करते हैं और परिवार के साथ खास पकवान बनाते हैं। गुड़ी पड़वा पर पारंपरिक मिठाइयों और नमकीन व्यंजनों की खास जगह होती है। खासतौर पर पूरन पोली को इस त्योहार की पहचान माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं गुड़ी पड़वा से जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में।
गुड़ी पड़वा का सम्बन्ध रामायण काल
गुड़ी पड़वा की पौराणिक कथा गुड़ी पड़वा से जुड़ी एक बहुत ही प्रसिद्ध कथा रामायण काल से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेतायुग में किष्किंधा नामक राज्य पर बाली नामक राजा का शासन था, जो अपने भाई सुग्रीव को परेशान करता था।
जब भगवान श्रीराम माता सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाने जा रहे थे, तब उनकी मुलाकात सुग्रीव से हुई। सुग्रीव ने श्रीराम को अपने कष्ट बताए और मदद मांगी। श्रीराम ने वाली का वध कर सुग्रीव को न्याय दिलाया और उसका खोया हुआ राज्य वापस लौटाया।
बताया जाता है कि, यह घटना चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन हुई थी, इसलिए इस दिन को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। बता दें कि इस दिन से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी होती है।

