23 मार्च 2026 चंद्रपुर के 4 खबर भटाली खदान हादसे के बाद दिल्ली तक हड़कंप, 2 महीने पहले दी थी चेतावनी, फिर भी जोखिम में डाली 4 कर्मियों की जान (रिपोर्टर:- नरसिंग बी बोल्लम आजतकन्युज18.इन
वेकोलि भटाली खदान हादसे की जांच शुरू। DGMS और कोल इंडिया की टीमें पहुंचीं। कर्मचारियों का आरोप- दो महीने पहले दी गई चेतावनी को अधिकारियों ने किया नजरअंदाज ।
भटाली का 11 मार्च की आधी रात के हुए दुर्घटना में भले ही जान हानि नहीं हुई, लेकिन उक्त दुर्घटना ने वेकोलि मुख्यालय, कोल इंडिया मुख्यालय, भारत सरकार की सुरक्षा संबंधित विभाग डी जी एम एस सहित तमाम सभी विभाग के दावे को झुठला दिया है कि खदानों में तय मानक अनुसार काम होता है।
दुर्घटना के बाद से संबंधित विभाग की बड़े शहरों अधिकारियों को खदान परिसर में आना जाना लगा हुआ है। सूत्र बताते हैं कि हर दुर्घटना के बाद सप्ताह दो सप्ताह तक खानापूर्ति वाली जांच होती है। लेकिन कार्रवाई नगण्य ही रहता है। इस बार की दुर्घटना में स्पष्ट दिख रहा है कि किसकी गलती से दुर्घटना हुई है
संबंधित कर्मचारियों ने उपक्षेत्रीय प्रबंधक और खान प्रबंधक को दो महीने से बता रहे थे कि जहां से कोयले निकाले जा रहे हैं उसके ऊपर के शील्ड को पहले हटाया जाए। लेकिन उपक्षेत्रीय प्रबंधक और खान प्रबंधक ने पावर के जोर पर जबरदस्ती काम करवा रहे थें। नतीजा सब के सामने है। वेकोलि के एक अधिकारी व तीन कर्मचारियों मौत के मुंह से निकले हैं।
दो महीने पहले ही अधिकारियों को किया था सूचित
अलग-अलग विभिन्न टीमों द्वारा हफ्तों तक जांच होने के बावजूद किसी की गलतियों को पता ना चले तो ऐसी जांच का क्या मतलब रह जाता है। ऐसा लगता है कि जांच के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। 11 तारीख की आधी रात को हुई दुर्घटना में कर्मचारियों ने अधिकारियों को दो महीने पूर्व में सूचित किया था कि दुर्घटना की संभावना है, फिर भी जबरदस्ती काम करवाया जाता रहा।
स्पष्ट है कि दोषी कौन है?
ऐसे में दोषी अधिकारियों पर उचित कार्रवाई अपेक्षित है। भटाली खदान के सब एरिया मैनेजर धोबले से मोबाइल से संपर्क कर जब यह पूछा गया कि कर्मचारियों द्वारा दुर्घटना हो सकने की संभावनाए बताए जाने के बाद भी काम क्यों जारी रखा गया तो उन्होंने कहा कि जांच में सब सामने आ जाएगा। इसके बाद मोबाइल डिस्कनेक्ट कर दिया।
खबर 2) चंद्रपुर में बरसेगी ‘आग’! महाराष्ट्र के सबसे गर्म जिले पर आई चौंकाने वाली रिपोर्ट, 2 डिग्री बढ़ेगा तापमान
: चंद्रपुर होगा
महाराष्ट्र का सबसे गर्म जिला ! 2050 तक 2 डिग्री बढ़ेगा पारा। प्रो. सुरेश चोपने ने दी भीषण हीटवेव और बादल फटने जैसी घटनाओं की चेतावनी।
सेंटर फॉर साइंस टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी नामक शोध संस्थान ने महाराष्ट्र के सभी जिलों का अध्ययन करने के बाद चौंकाने वाली रिपोर्ट दी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 30 वर्षों की तुलना में गर्मियों और सर्दियों के तापमान में वृद्धि होगी। 2021-2050 के बीच तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की उम्मीद है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
शनिवार (22 मार्च) को केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सदस्य प्रो. सुरेश चोपने ने बताया कि बदलती जलवायु का बाढ़, कृषि, वन, वन्यजीव, स्वास्थ्य और विकास कार्यों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उनके अनुसार वर्ष 2022 की तरह ही 2026 में भी चंद्रपुर जिले में सर्वाधिक गर्मी पड़ेगी।
बेंगलुरु और नोएडा स्थित विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नीति केंद्र ने जनवरी 2022 में महाराष्ट्र के सभी जिलों के लिए यह रिपोर्ट जारी की। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और आईपीसीसी के आंकड़ों के आधार पर, 1990 से 2019 तक पिछले 30 वर्षों की तुलना में, वर्ष 2021-2050 में वायु प्रदूषण में मध्यम और उच्च वृद्धि का महाराष्ट्र की जलवायु पर प्रभाव पड़ने का अनुमान है।
चंद्रपुर जिले के एक अध्ययन से पता चलता है कि पिछले कई वर्षों की तुलना में चंद्रपुर में हीट वेव की घटनाओं में वृद्धि हुई है, लेकिन अच्छी खबर यह है कि 2021 से 2050 के बीच चंद्रपुर में हीट वेव के दिनों की संख्या में कुछ कमी आने की संभावना है। लेकिन मौसम विभाग के अध्ययन में अत्यधिक तीव्र गर्मी की लहरों की संभावना बढ़ने की भविष्यवाणी की गई है।
खबर 3) नगर निगम ने पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक प्रतिबंध के संबंध में एक जन जागरूकता
और जब्ती अभियान को उत्साहपूर्वक लागू किया।
महाकाली मंदिर क्षेत्र में एक विशेष प्लास्टिक मुक्ति अभियान का आयोजन किया गया, जिसमें नागरिकों को प्लास्टिक के उपयोग से बचने के लिए मार्गदर्शन दिया गया।
एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के उपयोग से बचने की अपील की गई।
कपड़े के थैलों और अन्य पर्यावरण अनुकूल विकल्पों के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया।
क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद, नियमों का उल्लंघन करने वालों से प्लास्टिक सामग्री जब्त की गई और उन्हें चेतावनी दी गई।
आइए, हम सब मिलकर चंद्रपुर को प्लास्टिक मुक्त, स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए काम करें!
खबर 4) करोड़ों स्वाहा, नतीजा सिफर ! इरई नदी के छठे अभियान की तैयारी, पर क्या मानसून से पहले पूरा होगा काम?
चंद्रपुर की इरई नदी के गहरीकरण का छठा अध्याय ! 11 साल और करोड़ों के खर्च के बाद भी नदी बदहाल। प्रशासन की तैयारी और जनआंदोलन के सवालों पर विशेष रिपोर्ट।
चंद्रपुर शहर की
जीवनदायिनी इरई नदी आज भी अधूरे गहरीकरण के कारण मरणासन्न स्थिति में है। नदी में गाद जमने से इसका तल उथला हो गया है। नदी के पुनरुद्धार के लिए प्रशासन ने वर्ष 2015 में पहली बार गहरीकरण अभियान शुरू किया था। पिछले 11 वर्षों में यह अभियान पांच बार चलाया जा चुका है और करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन अब तक नदी का समुचित गहरीकरण नहीं हो सका है
अब एक बार फिर महानगरपालिका और जिला प्रशासन छठे चरण में गहरीकरण अभियान शुरू करने की तैयारी में है। ऐसे में चंद्रपुरवासियों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार सच में इरई नदी का पुनरुद्धार हो पाएगा? इरई नदी चंद्रपुर शहर के समानांतर लगभग 9 किलोमीटर तक बहती है और आगे 17 किलोमीटर दूरी पर वर्धा नदी में मिलती है।
चंद्रपुर महाऔष्णिक विद्युत केंद्र और वेकोलि की खदानों से निकले ओवरबर्डन के कारण नदी का तल उथला हो गया है। नदी के भीतर झाड़ियां और वनस्पति भी बड़ी मात्रा में उग आई हैं। हर बार गहरीकरण का काम देर से शुरू होने के कारण प्री-मानसून के साथ काम ठप हो जाता है। वर्ष 2025 में भी यही स्थिति बनी रही और पूरा अभियान अधूरा रह गया। अब नागरिकों में यह चर्चा है कि क्या इस बार भी वही हालात दोहराए जाएंगे।
जिलाधिकारी विनय गौड़ा ने कहा कि इरई नदी का गहरीकरण सभी के लिए महत्वपूर्ण विषय है। इस वर्ष काम जल्दी शुरू किया जाएगा। महानगरपालिका द्वारा टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और अगले दो सप्ताह में काम शुरू होने की संभावना है।

