Saturday, April 18, 2026
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भिमनगर सार्वजनिक सभागृह पर निजी कब्जा? RTI में बड़ा खुलासा – 15 लाख मंजूर, काम केवल 5 लाख का; ग्राम पंचायत चुप क्यों?

भिमनगर सार्वजनिक सभागृह पर निजी कब्जा? RTI में बड़ा खुलासा – 15 लाख मंजूर, काम केवल 5 लाख का; ग्राम पंचायत चुप क्यों?

 

दुर्गापुर के भिमनगर वार्ड क्रमांक 4 में स्थित राजाभोज सभागृह गंभीर अनियमितताओं, अवैध कब्जे और निधि गबन के शक के कारण चर्चा में है। सार्वजनिक बांधकाम विभाग से प्राप्त आरटीआई दस्तावेजों में स्पष्ट उल्लेख है कि यह सभागृह पूरी तरह से सरकारी फंड से निर्मित सार्वजनिक सभागृह है। इसके बावजूद सभागृह के मुख्य द्वार पर एक निजी संस्था का नाम बड़े अक्षरों में लिखा हुआ है और पूरी इमारत को निजी संपत्ति की तरह चलाया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कार्यक्रमों के लिए दो हजार रुपये तक वसूले जाते हैं, जो पूरी तरह अवैध है।

RTI से पता चला है कि इस सभागृह के लिए ग्राम विकास निधि 2019 के अंतर्गत 15 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। लेकिन सभागृह की मौजूदा स्थिति देखकर स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां 5 लाख रुपये का भी काम नहीं हुआ दिखता। बाकी 10 लाख रुपये कहां गए? किसके माध्यम से खर्च दिखाया गया? माप-पत्र की जांच किन अधिकारियों ने की? — इन सवालों का जवाब आज तक नहीं मिला है। इससे निधि गबन का शक और गहरा हो गया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सार्वजनिक धन से बने सभागृह पर निजी संस्था का बोर्ड किस अधिकार से लगाया गया? सभागृह का नियंत्रण इस संस्था को कैसे मिला? सार्वजनिक संपत्ति पर शुल्क वसूली का अधिकार किसने दिया? भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के अनुसार यह कृत्य दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद पिछले पांच वर्षों में न जांच हुई, न कार्रवाई, न ही अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया — इससे ग्राम पंचायत की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का साफ आरोप है कि “कुछ देन–लेन” कर मामला दबा दिया गया।

ग्राम पंचायत, सार्वजनिक बांधकाम विभाग और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट करना होगा कि 15 लाख की मंजूरी के बावजूद सभागृह कच्चा, अधूरा और निम्न स्तर का क्यों है। सार्वजनिक भवन पर निजी संस्था का नाम किस आधार पर चढ़ाया गया। दो हजार रुपये की अवैध वसूली कैसे शुरू हुई। और पांच साल तक पूरा प्रशासन खामोश क्यों बैठा रहा।

यह सभागृह पूरी तरह सार्वजनिक संपत्ति है और इस पर सभी नागरिकों का बराबर अधिकार है। निजी कब्जा, नाम पट्ट लगाना या शुल्क वसूली — ये सभी सीधे-सीधे दंडनीय अपराध हैं। ग्रामस्थों की मांग है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और सभागृह को जनता के लिए मुक्त कराया जाए।

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